पौड़ी के रहने वाले अजय ओली कर रहे हैं शिक्षा के क्षेत्र में बहेतरीन काम

2015 में लखनऊ से अपनी नोकरी छोड़कर लौटे पहाड़, अब तक 1300 संस्थाओं के साथ करीब 2 लाख बच्चों को शिक्षा से जोड़ चुके हैं।

हर साल स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दिए जाने वाले राष्ट्रीय पुरस्कारों के लिए इस साल 7 युवाओं का चयन हुआ है जिनमें उत्तराखंड के अजय ओली भी शामिल हैं उन्हें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार दिया जाएगा।

अजय ओली पिछले कुछ सालों से शिक्षा के क्षेत्र में काफी बेहतरीन काम कर रहे हैं। वह बच्चों को शिक्षा से जोड़ने,उन्हें बाल श्रम से दूर रखने और बाल शिक्षा को बढ़ावा देने के अभियान में काम कर रहे हैं।

1992 में एक फौजी परिवार में जन्में अजय ओली की उम्र अभी मात्र 29 साल है और वह मूल रूप से टाणा पिथौरागढ़ के रहने वाले हैं। उन्होंने बच्चों को जागरूक करने और बच्चों की शिक्षा के क्षेत्र में 2015 से यह कार्य शुरू किया था। अपनी इस मुहिम को शुरू करने के लिए वह लखनऊ से नंगे पांव पैदल चले थे।

युवा और गरीब बच्चों को अपना जीवन समर्पित करने वाले अजय ने मानव संसाधन, होटल मैनेजमेंट और टूरिज्म में मास्टर की डिग्री हासिल की है और वह एक प्राइवेट नौकरी में भी काम करते थे। लेकिन बच्चों को शिक्षा से जोड़ने और इस मुहिम के लिए उन्होंने अपनी नौकरी त्याग दी।

आज वह देशभर के 110 से अधिक शहर, 8 राज्यों और 13000 से अधिक संस्थानों में जाकर 1,70,000 से अधिक लोगों को जागरूक कर चुके हैं और हजारों लोगों को उनकी इस महीने से जुड़ चुके हैं। उनकी इस मुहिम की खास बात यह है कि वह अब तक एक लाख से भी ज्यादा किलोमीटर नंगे पांव चल चुके हैं

कठिनाई भरे इस सफर में अजय के साथ बच्चों की मुस्कान और उनकी शिक्षा एक हौसले के रूप में काम करती रही। वह अब तक लगभग 170,000 से अधिक गरीब और निर्धन बच्चों को शिक्षा से जुड़ चुके हैं। राष्ट्रपति राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने की सफलता का श्रेय वह अपने पूरे परिवार और उनके इस सफर में कंधे से कंधा मिला के रखने वाले साथियों को देते हैं जिनमें उनके दादाजी घनश्याम ओली, दादी धनेश्वरी ओली, पिता गिरीश ओली, बुआ प्रेमा सुतेडी,भाई अमित ओली पूर्व डीएम श्री सी रविशंकर, पूर्व सीओ शेखर सियाल व साथियों को देते हैं।

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