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उत्तराखंड में आग से झुलस रहे हैं जंगल, बारिश न होने से खतरा ओर बढ़ा

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70% से भी अधिक वन्य भाग वाले उत्तराखंड (उत्तराखंड) में इस साल सर्दियों के मौसम से ही जंगलों का जलना शुरू हो गया है। वन विभाग (forest range) द्वारा जारी किए गए जारी वर्तमान आंकड़ों के मुताबिक पिछले 4 महीने के अंदर राज्य के अलग-अलग 200 जगहों 252 घटनाओं में 336 हेक्टेयर जंगल अब तक जल चुका है। वन विभाग ने चिंता जताई है कि इस साल बारिश कम हुई है और तापमान अब धीरे-धीरे लगातार बढ़ रहा है। तापमान बढ़ने के साथ-साथ उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में आग लगने की घटनाएं भी लगातार बढ़ती रहती हैं। जंगलों को आग से बचाने के लिए ऐतिहात के तौर पर वन विभाग ने अपने सभी विभागों के साथ-साथ कंट्रोल बर्निंग रूम, वर्क स्टेशन कर्मियों की तैनाती शुरू कर दी है। इसके अलावा जंगलों में आग ज्यादा न फेल पाए इसके लिए भी सभी प्रभागों को चाक-चौबंद प्रबंध करने के निर्देश दे दिए गए हैं साथ ही अलग-अलग जिला और ब्लॉक स्तर पर छोटी-छोटी कमेटियां गठित कर दी गई हैं।

सर्दियों के बाद से मानसून आने तक की अवधि जंगलों के लिए लिहाज से बेहद संवेदनशील मानी जाती है इसी दौरान जंगलों में आग लगने की घटनाएं अधिक बढ़ जाती हैं इसीलिए इस सीजन को फायर सीजन भी कहा जाता है। लेकिन इस साल तो ना उचित मात्रा में बारिश हुई है और अब तापमान ने भी करवट बदल ली है। आंकड़ों की बात की जाए तो पिछले साल अक्टूबर से अब तक गढ़वाल क्षेत्र में आग लगने की कुल 162 घटनाएं हुई हैं जिनमें 201.55 हेक्टर जंगल झुलस चुका है। इसी तरह कुमाऊं में भी अलग-अलग जगहों पर आग लगने की 90 घटनाएं सामने आई जिसमें 132.37 हेक्टेयर जंगल को नुकसान पहुंचा है।

जाहिर है तापमान बढ़ने के साथ-साथ अब वन विभाग को हाई अलर्ट मोड पर रहना होगा और इसके लिए वन विभाग ने पूरी तैयारियां भी शुरू कर दी हैं उत्तराखंड के वन्य इलाकों में कंट्रोल बर्निंग,फायर लाइन की सफाई, कंट्रोल रूम,क्रूज स्टेशन, वन कर्मियों,ब्लॉक और जिला स्तर पर छोटे-छोटे कमेटियों के साथ-साथ युवा वन अग्नि सुरक्षाकर्मियों की तैनाती भी की जा रही है। जंगलों पर ज्यादा आग फैल न पाए इसकी निरंतर मॉनिटरिंग के लिए वायरलेस सिस्टम को भी स्थापित किया जा रहा है। ताकि सूचना मिलने पर उचित व्यवस्था की जाए। वन विभाग के नोडल अधिकारी मान सिंह कहते हैं कि अक्टूबर से लेकर अब तक बारिश बहुत कम मात्रा में हुई है ऐसे में जंगली इलाकों में नमी बहुत कम होने के कारण घास सूख जाती है ऐसे में पहाड़ी क्षेत्र में आग लगने की ज्यादा घटनाएं बढ़ती हैं। आने वाले समय में वन विभाग को चौकन्ना रहने के साथ-साथ उत्तराखंड की जंगलों को आग से बचाने की एक बड़ी चुनौती होगी।

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