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बाबा केदार की भूमि ग्राम पैलिंग में पूरी विधि-विधान व पूजा अर्चना के साथ धूमधाम से सम्पन हुआ भगवान क्षेत्रपाल देवता के मंदिर का जीर्णोद्धार कार्यक्रम

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भीरी, रुद्रप्रयाग : प्रकृति की उतुंगवादियों में रचा-बसा मेरा गाँव पैलिंग, प्राकृतिक सौन्दर्य व दैवीय शक्ति से परिपूर्ण बेहद खूबसूरत गाँव है। जैसे कि उत्तराखण्ड देवताओं की भूमि है। यह देवभूमि के साथ- साथ ऋषि मुनियों की तपस्थली रही है। हमारा गाँव पैलिंग भी पैल ऋषि की तपस्थली रहा है।

मान्यता है कि प्राचीन काल में यहाँ गाँव के पूर्व में शिवालय था, जो भूस्खलन के कारण नष्ट हो गया था। लेकिन उस स्थान पर भगवान केदारेश्वर का लिंग अभी भी विद्यमान है, यह लिंग ठीक भगवान केदारनाथ में स्थित लिंग की तरह ही है। हो सकता है कि इसीलिए हमारे गाँव का नाम पैलिंग पड़ा हो।

इसके दो ही कारण हो सकते हैं। पहला पैल ऋषि की तपस्थली तथा दूसरा भगवान भोलेनाथ का आदिलिंग जिस कारण इसका नाम पैलिंग पड़ा होगा। कारण जो भी हो लेकिन यहाँ पहुँचने पर दिल को बहुत सुकून मिलता है। गाँव से दिव्य केदार हिमालय के पावन दर्शन मन को मोहित कर देता है। गाँव के मध्य में ग्राम रक्षक क्षेत्रपाल, पूर्व में श्री सिद्धनाथ, दक्षिण में माँ भगवती, पश्चिम में माँ काली, नन्दा राजराजेश्वरी व उत्तर में माँ चण्डिका दिक्पाल के रूप में ग्राम रक्षक हैं।
यहाँ पहले से ही अपनी परम्पराओं व रीति-रिवाजों को बखूबी से निभाया जाता है।

श्री नन्दा देवी लोक जात, पाण्डव नृत्य, बग्ड्वाळ नृत्य, श्री नाग – सिद्धनाथ नृत्य आदि धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन समय-समय पर होते रहते हैं। भगवान क्षेत्रपाल व माँ दक्षिण काली हमारे इष्ट व ग्राम देवता हैं।

क्षेत्रपाल जैसे कि अष्ट भैरव के रुद्रावतार में से एक हैं। उन्हें अपनी छोटी कुटिया में ही रहना पसन्द है। लेकिन काफी समय से बाबा के आलय का जीर्णोद्धार नहीं हो पाया था। जिस कारण बाबा क्षेत्रपाल की सहमति से दि० 13/08/2021 से मन्दिर का जीर्णोद्धार कार्य प्रारम्भ किया गया, तदुपरान्त आज (कल) सकलीकरण, दस दिक्पाल पूजन व हवन के साथ बाबा को पुनः अपनी कुटिया पर अवस्थित कर दिया गया है।
ठीक शाम 6:00बजे पूर्णाहुति के साथ इस दिव्य कार्यक्रम का विसर्जन किया गया।

इस सुअवसर पर देवी-देवताओं ने अवतरित हो कर सुफल बाँटा।
यह दैव कार्यक्रम ग्राम पण्डित श्री शिव प्रसाद सेमवाल जी के प्रधान आचार्यत्व के साथ-साथ पण्डित श्री गिरीश चन्द्र सेमवाल जी व पण्डित श्री विनोद प्रसाद मैठाणी जी के सानिध्य में हुआ। बाजगिरी में श्री मनोज लाल व उनके सहयोगी चन्द्र पाल ने सहयोग किया।

इस दिव्य व भव्य कार्यक्रम को अंजाम देने के लिए वन पंचायत सरपंच श्री महावीर सिंह नेगी मुख्य भूमिका में रहे, मन्दिर जीर्णोद्धार कार्यक्रम में श्री गजपाल सिंह सुरज्वाण मिस्त्री, श्री कुंवर सिंह सुरज्वाण, हिम्मत नेगी, रवीन्द्र राणा, धर्मेन्द्र नेगी, धर्मेन्द्र नेगी, नरेन्द्र नेगी, की भूमिका में रहे।जिन्होंने 4-4 दिन का श्रम दान देकर पुण्य अर्जित किया।

ग्राम प्रधान श्रीमती सावित्री देवी, महिला मंगल दल अध्यक्ष श्रीमती गुड्डी देवी, कीर्तन मण्डली अध्यक्ष श्रीमती सरस्वती देवी, नवयुवक मंगलदल अध्यक्ष श्री रवीन्द्र राणा, श्री भूतनाथ सांस्कृतिक कला मंच के अध्यक्ष श्री गौर सिंह नेगी, उपप्रधान श्री पुष्कर सिंह नेगी आदि सभी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। श्री भरत सिंह नेगी जिनका परिवार अब मध्यप्रदेश में रह रहा था। 11000 की सहयोग राशि प्रदान की।

श्री क्षेत्रपाल के पशुवा – प्रताप सिंह नेगी,माँ काली – माधव सिंह नेगी, चण्डी – श्री कुंवर सिंह
अन्य सहयोगी – राजेन्द्र सिंह, पूर्व प्रधान – यशवीर राणा
श्री भीम सिंह नेगी, श्री उदय सिंह राणा,श्री सुजान सिंह नेगी, विक्रम, अंकित, सनोज, मनोज, त्रिलोक, विजय सिंह, प्रदीप, सोहन, आनंद, सुमित, नारायण सिंह, बचन सिंह, शिवसिंह, बलराम सिंह, जीतपाल सिंह, प्रताप सिंह नेगी, विजय पाल सिंह, अवतार सिंह, सुरेन्द्र, कैलाश, अकेन्द्र, बीर सिंह नेगी, सत्ये सिंह, प्रेमसिंह सुरज्वाण, यशपाल दुमागा, रघुवीर राणा, दरवान राणा, लाल सिंह, लवकेश, जगदीश सुरज्वाण कोषाध्यक्ष – बख्तावर सिंह नेगी, महिपाल सिंह, भ्यूंराज सिंह सुरज्वाण, सुदेश, रघुवीर सिंह सुरज्वाण, सैन सिंह सुरज्वाण, नरेन्द्र सिंह सुरज्वाण, अंकुश सुरज्वाण, सतीश सुरज्वाण, ताजबर सिंह नेगी, प्रकाश सिंह, गजेन्द्र राणा, प्रकाश, विक्रम ( कोल्याणी), अंकित सिंह, विजय सिंह 1,विजय सिंह 2,अंकित दुमागा, देवेन्द्र सिंह, वीर सिंह नेगी,देवेश, किशन, गजेन्द्र
आदि महिला – पुरुष सहित समस्त ग्रामीणों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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