उत्तराखंड के युवा और उत्तराखंड के लोग आज बाहरी देशों में किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। chef का नाम सुनते ही सबसे पहले ज़हन में आता है उत्तराखंड ओर यहाँ के युवाओं की वह आधी आबादी जो इस पैशे के पीछे लगातार पिछले कई दशकों से अपनी मेहनत और जी जान से लगी हुई है।

बड़े बड़े पदों पर हैं कार्यरत

आज देश के अलग-अलग कोनों और बाहरी देशों में बसे उत्तराखंड के लोग और ख़ास कर होटल से जुड़े हुए लोग किसी के परिचय के मोहताज नहीं है। आज इन लोगों की अपनी ही एक अलग पहचान है। आप आज देश ही नहीं विदेश के किसी भी बड़े होटल में चले जाइए वहां पर आपको उत्तराखंड का कोई ना कोई युवा होटल में शेफ जरूर मिल जाएगा। यही नहीं विदेशों और भारत के कई बड़े पांच सितारा होटलों जैसे लीला, ताज, रेडिसन, आय टी सी, ललीत, जे डब्लू मैरियट, हयात के प्रमुख क्षेत्रों में भी उत्तराखंड के chef शामिल हैं।

नहीं मिल पाई सही पहचान

आज उत्तराखंड के युवा शेफ जरूर कई देशों में फैले हुए हैं और जी जान से मेहनत कर अपने कार्य को पूरा कर रहे हैं, लेकिन जिस कार्य को वह कर रहे हैं उसमें वह अभी तक अपनी पहचान बनाने में नाकामयाब रहे हैं। जिसका एक प्रमुख कारण तालमेल की कमी भी है। उत्तराखंड के युवा कई सालों से बाहरी देशों और भारत के अलग-अलग हिस्सों में सिर्फ एक कामगार के रूप में काम करते हैं। लेकिन उनके बीच ऐसा तालमेल नहीं बना कि वह किसी एक ऐसे संगठन का निर्माण करें जो कि उनकी पहचान बन सके और इस संगठन के अंतर्गत वह अपने कार्यों को एक स्थगित ढांचे से आगे बढ़ाएं।

होटल के हर क्षेत्र में पहाड़ी

आज उत्तराखंड के लगभग 70% युवा होटल के व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। जिनमें से कुछ शेफ हैं, कुछ हेल्पर हैं, कुछ एक्सक्यूटिव शेफ हैं, कुछ रेस्टोरेंट मैनेजर हैं और कुछ रेस्टोरेंट मलिक भी हैं। मार्च 2020 में हुए लॉकडाउन के चलते आज होटल इंडस्ट्री अपने सबसे निचले स्तर पर है,और इससे जुड़े हजारों-लाखों लोगों को अपनी नौकरियों से हाथ धोना पड़ा है। होटल इंडस्ट्री में उत्तराखंड के अधिक युवा होने के कारण यहाँ के युवाओं पर इसका ओर ज्यादा असर देखने को मिला। लॉकडाउन की वजह से भारत के अलग अलग कोनों ओर विदेशों में काम करने वाले उत्तराखंड के लोग होटल न चल पाने की वजह से बेरोजगार बैठे हैं।

कहाँ रह गयी कमीं

आज भी होटल से जुड़े हुए अलग अलग कार्यों में कई युवा ऐसे हैं जो कि इस पेशे से सालों से जुड़े हुए हैं। लेकिन अपने काम के प्रति आज तक उन्हें वह इज्जत और वह पहचान नहीं मिल पाई है जो कि उन्हें मिलनी चाहिए थी। जिसके पीछे एक बड़ी वजह आपसी तालमेल की कमी और उनके अंदर का हीन भाव हो सकता है।

दो ही हैं विकल्प

आज उत्तराखंड राज्य को बने हुए लगभग 21 साल हो गए हैं लेकिन आज भी उत्तराखंड में जब कोई युवा 12वीं पास करता है तो उसके पास दो ही रास्ते होते हैं। या तो वह भारतीय सेना को ज्वाइन करे या तो वह किसी होटल में जाकर नौकरी करे। उत्तराखंड से कई युवा भारतीय सेना में जाने के लिए जी जान मेहनत भी करते हैं लेकिन किन्ही कारणों बस अगर वह भारतीय सेना में नहीं निकल पाते हैं तो वह होटल के रास्ते को अपना लेते हैं जिसका मतलब है कि उत्तराखंड के 70% युवाओं के पास 12वीं के बाद एकमात्र होटल का ही विकल्प बचता है।

बन सकती है अलग पहचान

आप और हम खुद सोच सकते हैं कि जब उत्तराखंड के 60 से 70% युवा होटल इंडस्ट्री से जुड़े हुए हैं और होटल के बड़े-बड़े पदों पर कार्यरत हैं तो उन्हें आज तक वह पहचान क्यों नहीं मिल पायी है …? इसके पीछे यही वजह है कि हम इन लोगों से जुड़ा हुआ कोई एक मजबूत संगठन नहीं बना पाए हैं और कहीं ना कहीं उसके पीछे हमारे अंदर की तालमेल की कमी भी है। होटल इंडस्ट्री से जुड़े हुए बड़े लोग और युवा अगर आगे आकर एक संगठन के रूप में कार्य करते हैं तो भविष्य में उन्हें विश्व स्तर पर एक नई पहचान के साथ-साथ सम्मान भी मिल सकता है।

उत्तराखंड के मशहूर मास्टर शेफ विकास कुरियाल भी कहते हैं कि हमारे उत्तराखंड से होटल इंडस्ट्री में कई सारे लोग जुड़े हुए हैं लेकिन वह एक मंच पर नहीं आए हैं। इसके पीछे कहीं न कहीं हमारे आपसी तालमेल की कमी है ,जो कि बहुत जल्द दूर की जानी चाहिए। वह कहते हैं कि अपने उत्तराखंड के युवाओं और लोगों को एक मंच पर लाने के लिए उन्होंने शेफ एसोसिएशन ऑफ गढ़वाल की भी स्थापना की है जिसका मकसद है कि भारत और विदेशों में फैले हुए उत्तराखंड के युवाओं को एक मंच पर लाना, उन्हें गाइड करना,उन्हें रोजगार के लिए अवगत कराते रहना और होटल से जुड़े हुए अन्य व्यवसायियों के बारे में बताते रहना।

आज इस एसोसिएशन के साथ लगभग उत्तराखंड के 10,000 लोग जुड़े हुए हैं जो कि अलग-अलग देशों में कार्यरत हैं और कई सारे युवा लगातार जुड़ रहे हैं। सेफ एसोसिएशन ऑफ गढ़वाल हर साल उत्तराखंड में मास्टर सेफ ऑफ उत्तराखंड के नाम से भी एक कंपटीशन आयोजित करवाते हैं जिसका मकसद है कि उत्तराखंड के टैलेंट को अधिक से अधिक प्रमोट किया जाए। मास्टर शेफ विकास कुरियाल कहते हैं कि “हमारा मकसद है कि हम उत्तराखंड के युवाओं को एक बड़ा से बड़ा मंच दें और उन्हें दुनिया के हर उस मंच पर प्रस्तुत करें जहां पर वह अपना हुनर दिखा सकते हैं। आज हमसे जुड़े हुए लोग कई बड़े-बड़े होटलों में कार्यरत हैं और हम कोशिश करते हैं कि शेफ एसोसिएशन ऑफ गढ़वाल से जुड़े हुए हर युवा को हम होटल इंडस्ट्री में आने वाली नई नई वैकेंसी ओर मौकों से अपडेट कराते रहें या उन्हें रोजगार मुहैया करवाते रहें”

फिसाडी सरकारी तंत्र

होटल व्यवसाय से इतने सारे युवा जुड़े होने के बावजूद भी आज तक उत्तराखंड सरकार ने होटल कर्मियों और उत्तराखंड के इन युवाओं के लिए कोई ठोस प्लान नहीं बनाया न ही इनके लिए कोई ठोस कार्ययोजना तैयार की। जो कि हमारे सरकारी तंत्र की एक बहुत बड़ी खामी है। आज बेशक हमारे उत्तराखंड के लोग अपने दम पर देश विदेश के बड़े-बड़े होटलों में बड़े-बड़े कार्य पदों पर कार्यरत हैं लेकिन फिर भी हमारी उत्तराखंड सरकार की ओर से उनको ना तो कोई समर्थन मिलता है और ना ही उन्हें कोई मंच प्रदान किया जाता है।

आप उत्तराखंड के शेफ (chef) और होटल से जुड़े हुए युवाओं के बारे में क्या सोचते हैं हमें अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

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