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जानिए क्यों लगी बाबा रामदेव की कोरोना किट ‘कोरोनिल’ के प्रचार प्रसार पर रोक

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कोरोना जैसी महामारी का इलाज ढूंढने के लिए पिछले लगभग तीन महीने से पूरी दुनिया भर में जद्दोजहद चल रही है लेकिन अभी तक इस बीमारी का कोई सटीक इलाज,वैक्सीन या दवाई नहीं मिल पाई है। ऐसे में भारतीय आयुर्वेदिक के जाने-माने योग गुरु बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद ने दावा किया है कि उन्होंने कोरोना जैसी महामारी को खत्म करने के लिए एक आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों से बनी हुई दवा तैयार कर दी है जिसे मंगलवार को लॉन्च कर दिया गया।


कोरोनिल नाम के इस कोरोना किट में बाबा रामदेव ने तीन दवाइयों जिसमें कोरोनिल टेबलेट,स्वसहारी और अणु तेल को शामिल किया गया है दिव्या कोरोनिल को लॉन्च करते हुए बाबा रामदेव ने कहा कि जिस दवाई का दुनिया को इंतजार था वह आयुर्वेद के आशीर्वाद से हमने तैयार कर ली है इसके पीछे हमने कई सारी मेडिकल स्टडीज की हैं और इसे लगभग200 से 250 लोगों के ऊपर टेस्ट किया गया जिसमें कि 69% मरीज 1 से 7 दिन के अंदर ठीक हो गए और उनके कोरोना सैंपल पॉजिटिव से नेगेटिव निकले। साथ ही बाबा रामदेव ने दावा किया कि उन्होंने विज्ञान के तमाम फार्मूला को ध्यान में रखते हुए आयुर्वेद के सहारे इस दवाई को तैयार किया गया हैऔर इसमें बड़े-बड़े डाक्टरों और रिसर्च संस्थानों की मदद ली गई।
बाबा रामदेव ने यह भी जानकारी दी कि 14 से 60 साल तक की उम्र के लोग इस दवा को दिन में दो बार यानी कि सुबह शाम ले सकते हैं और 1 से 14 साल के बच्चे दिन में एक बार एक-एक गोली का सेवन कर सकते हैं। बाबा रामदेव ने कहा की यह कोरोना किट जल्द ही 1 सप्ताह के अंदर बाजार में उपलब्ध हो जाएगा और उनकी पूरी कोशिश होगी कि इसकी मार्केट में कोई कमी ना हो साथ ही उन्होंने कहा कि इस दवाई को बनाने के लिए हमारे पास विधि के साथ-साथ तमाम रो-मटेरियल तय मात्रा में उपलब्ध है। पतंजलि के साथ इस दवा को बनाने में नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस जयपुर ने भी अहम भूमिका निभाई है दावा किया जा रहा है की इस दवा के सेवन से1 से 3 दिन के अंदर 69 फ़ीसदी कोरोना वायरस मरीज इनएक्टिव हुए और 7 से 14 दिन के अंदर 100 फ़ीसदी मरीज नेगेटिव हो गए। अगर बाबा रामदेव का यह आयुर्वेदिक नुस्खा सफल साबित होता है तो यहाँ आयुर्वेद जगत के लिए एक बड़ी कामयाबी हो सकती है।


वहीं लॉन्च के कुछ समय बाद ही दवाई के सभी मानक सिद्ध न कराये जाने पर आयुष मंत्रालय ने इस दवाई के प्रचार प्रसार पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। साथ ही कहा है की जब तक ICMR और आयुष मंत्रालय इसकी पूरी जाँच नहीं कर लेते तब तक इसे आगे भी नहीं बढ़ाया जा सकता है। हालाँकि इस मामले पर पतंजलि ने दवा किया है की उसने सभी मानकों का पालन किया है और इसकी जानकारी उसने ICMR और आयुष मंत्रलय दोनों को दी है जिसकी कुछ प्रतियाँ आचार्य बालाकृष्णा ने साझा की हैं।

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