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केसर की खेती का नया गढ़ जौनसार,स्वरोजगार अपनाने के लिए है एक बेहतरीन मौका

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स्वरोजगार अपनाने को लेकर इस वक्त उत्तराखंड में कई सारी चर्चाएं चल रही हैं और हर कोई इस जद्दोजहद में लगा है कि जो प्रवासी शहरों को छोड़कर गांव लौटे हैं वह गांव में रहकर अब स्वरोजगार की ओर कदम बढ़ाएं और यहीं पर रह कर कुछ काम करें और स्वरोजगार को अपनाएं। जिससे कि स्वरोजगार को बढ़ावा मिल सके और पलायन रोका जा सके।
कहते हैं कि अगर ठान लिया जाए तो कोई भी काम मुश्किल नहीं होता,ऐसा ही उदाहरण आज हम आपके सामने पेश कर रहे हैं जी हांये हैं जौनसार बावर क्षेत्र के दुर्गम गांव किस्तुड़ के रहने वाले रणवीर चौहान जो कि आज केसर की खेती उगा कर अपनी आर्थिकी को मजबूत करने में जुटे हुए हैं वह भी बिना किसी सरकारी सहयोग के।
हमसे खास बातचीत में उन्होंने बताया कि उन्होंने बिना किसी सरकारी सहायता की अपनी तीन बीघा भूमि पर कश्मीरी केसर की उपज तैयार की है जिससे क्षेत्र में अब धीरे-धीरे स्वरोजगार के अवसर भी पैदा होने लगे हैं और उनको गांव वालों का भरपूर साथ भी मिल रहा है रणवीर सिंह ने कहा कि उनको केसर की खेती की यह प्रेरणा उनके एक कश्मीरी दोस्त इरफान से मिली थी और इरफान ने ही उनको केसर की खेती करने के लिए काफी प्रेरित किया ,उन्होंने ही इसके लिए कश्मीरी केसर के बीज भी उन्हें उपलब्ध कराए। आज उन्होंने इन बीजों की मदद से तीन बीघा भूमि पर केसर की खेती तैयार की है एक अनुमान के मुताबिक अब तक वह 30 किलो से ज्यादा केसर का उत्पादन भीकर चुके हैं और वह इस समय गांव के युवाओं को भी इस खेती की ओर प्रेरित कर रहे हैं।


रणवीर के मुताबिक उन्होंने अगस्त और सितंबर के महीने में टमाटर के जैसे क्यारी बनाकर केसर के बीजों को रोपा था और उसपर तय समय से उसकी देखभाल करते रहे,सिंचाई और गोड़ाई करते रहे और उसकी अब काफी अच्छी पैदावार हो गई है।
आपको बता दें कि मार्केट में इस केसर की बहुत डिमांड है और वर्तमान समय में बाजार में इसका मूल्य तीन लाख प्रति किलो से भी अधिक है साथ ही इस तरह की केसर की खेती को तीन चार बार उपयोग में लाया जा सकता है।
अब रणवीर चौहान की इस मेहनत को देखते हुए हम तो यही कहेंगे कि अगर आप भी अपने मन में ठान लें तो कोई भी काम कठिन नहीं होता आप भी पहाड़ों में रहकर स्वरोजगार को अपनाकर यहीं पर रोजगार के अवसर पैदा कर सकते हैं और अच्छी खासी कमाई कर सकते हैं क्योंकि वर्तमान समय में जैविक उत्पादन की मांग काफी तेजी से बढ़ रही है और इसका भविष्य भी काफी उज्जवल होने वाला है।

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