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जानिए कौन है उत्तराखंड के 11वें मुख्यमंत्री, और क्यों बने वो बीजेपी के खास

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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के इस्तीफे के बाद उत्तराखंड को अब ग्यारहवें मुख्यमंत्री के रूप में एक नया चेहरा में चुका है।

जी हां शनिवार को देहरादून में हुई बीजेपी की विधायक दल की बैठक में पुष्कर सिंह धामी(Pushkar Singh Dhami) को उत्तराखंड का नया मुख्यमंत्री चुना गया है। आपको बता दें कि पुष्कर सिंह धामी (pushkar singh dhami) खटीमा से लगातार दो बार विधायक रहे हैं और युवाओं के बीच वो काफी मशहूर भी है। उसी को देखते हुए भाजपा के मंत्रिमंडल ने उन पर भरोसा जताया है।

हालांकि उत्तराखंड में होने वाले 2022 के चुनाव से पहले इस तरह से एक युवा चेहरे पर दांव लगाना साफ दर्शाता है कि भाजपा 2022 में युवाओं को अपनी और आकर्षित करना चाहती है।

पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) के लिए आने वाले समय में राहें इतनी आसान भी नहीं होने वाली हैं। उनके पास मात्र 6 से 7 महीने का वक्त बचा हुआ है और इतने कम वक्त में उन्हें अपने आप को साबित करना होगा।


उत्तराखंड के 11वीं मुख्यमंत्री बनने से पहले पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami)भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। और वह उत्तराखंड के भूतपूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के काफी करीबी माने जाते हैं।

16 सितंबर 1975 को जन्मे 45 वर्षीय पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) उत्तराखंड के सीमांत जनपद पिथौरागढ़ की टुंडी तहसील के डीडीहाट से तालुक रखते हैं। उनके पिता फ़ौज में थे और उन्होंने अपने गांव से ही अपनी प्राथमिक व स्तनकोतर की शिक्षा पूरी की। वह अपने परिवार के चार भाई-बहनों में सबसे छोटे और अकेले भाई हैं। उनकी माता का नाम विश्रा देवी है और उनकी पत्नी का नाम गीता धामी है।

इससे पहले 20 सालों में उत्तराखंड को 10 और मुख्यमंत्री मिल चुके हैं। जिनमें नित्यानंद स्वामी, भगत सिंह कोश्यारी, नारायण दत्त तिवारी, भुवन चंद खंडूरी, रमेश पोखरियाल निशंक,भुवन चंद्र खंडूरी, विजय बहुगुणा, हरीश रावत,त्रिवेंद्र सिंह रावत,तीरथ सिंह रावत और अब 11वीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शामिल हैं।

प्रारंभिक जीवन:- माता जी का एक धर्मपरायण, मृदुभाषी एवं अपने परिवार के प्रति समर्पित धरेलू महिला होने तथा पिता की सैनिक होने के कारण देश की सरहद पर हर पल तन-मन न्यौछावर करने की दशा भक्ति की प्ररेणा से ओत-प्रोत वाल्य मन-मस्तिष्क में सदैव देश एवं प्रदेश के लिए कुछ कर गुजरने की ललक के कारण बचपन से ही स्काउट गाइड, एन0सी0सी0, एन0एस0एस0 इत्यादी शाखाओं में प्रतिभाग एवं समाजिक कार्यो को करने की भावना तथा ’’संधे शक्ति कलयुगें’’ के मूलमंत्र के आधार पर छात्र शक्ति को उनके हकों एवं उत्थान के लिए एक जुट करने के लिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुडने के मुख्य कारक रहे हैं।

लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्रों को एक जुट करके निरन्तर संधर्षशाील रहते हुए उनके शैक्षिणक हितों की लडाई लडते हुए उनके अधिकार दिलाये गये तथा शिक्षा व्यवस्था के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। राजनितिक दल भारतीय जनता पार्टी से जुडने का कारण भी राष्ट्रीयता, देशभक्ति, कमजोर एवं युवा बेरोजगार के प्रति कुछ कर गुजरने की भावना रही। यही राजनिति में आने का उदे्श्य रहा।

राजनीतिक जीवन

राजनितिक यात्राः- सन् 1990 से 1999 तक जिले से लेकर राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में विभिन्न पदों में रहकर विद्यार्थी परिषद में कार्य किया है। इसी दौरान अलग-अलग दायित्वों के साथ-साथ प्रदेश मंत्री के तौर पर लखनऊ में हुये अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय सम्मेलन में संयोजक एवं संचालन कर प्रमुख भूमिा निभाई।

राज्य की भौगोलिक परिस्थियों को नजदीक से समझते हुए क्षेत्रीय समस्याओं की समझ और उत्तराखण्ड राज्य गठन के उपरान्त पूर्व मुख्यमंत्री जी के साथ एक अनुभवी सलाहकार के रूप में 2002 तक कार्य किया। कुशल नेतृत्व क्षमता, संधर्षशीलता एवं अदम्य सहास के कारण दो बार भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए सन 2002 से 2008 तक छः वर्षो तक लगातार पूरे प्रदेश में जगह-जगह भ्रमण कर युवा बेरोजगार को संगठित करके अनेकों विशाल रैलियां एवं सम्मेलन आयोजित किये गये।

संधर्षो के परिणाम स्वरूप तत्कालीन प्रदेश सरकार से स्थानीय युवाओं को 70 प्रतिशत आरक्षण राज्य के उद्योगों में दिलाने में सफलता प्राप्त की। इसी क्रम में दिनांक 11.01.2005 को प्रदेश के 90 युवाओं को जोड़कर विधान सभा का धेराव हेतु एक ऐतिहासिक रैली आयोजित की गयी जिसे युवा शक्ति प्रदर्शन के रूप में उदाहरण स्वरूप आज भी याद किया जाता है।

कुशल नेतृत्व क्षमता तथा शैक्षिणिक एवं व्यावसायिक योग्यता के कारण पूर्ववर्ती भा0ज0पा0 सरकार में वर्ष 2010 से 2012 तक शहरी विकास अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष के रूप में कार्यशील रहते हुए क्षेत्र की जनता की समस्याओं का समाधान कराने में आशातीत सफलता प्राप्त की जिसका प्रतिफल जनता द्वारा 2012 के विधान सभा विधान सभा चुनाव में ’’विजयश्री’’ दिलाते हुए अपने जनप्रिय विधायक के रूप में विधान सभा में पहुॅचाकर उनकी आवाज को और भी अधिक बुलन्दी के साथ सरकार के समक्ष उठाते हुए क्षेत्रीय जनता को उनके मौलिक अधिकारों एवं जीवन यापन के हकों को दिलवाने के लिए उनके विधानसभा प्रतिनिध होने का गौरव प्राप्त हुआ है।

विधान सभा के मुख्य मुद्देः-

(क) राज्य स्तरीयः-
1. शिक्षित बेरोजगार युवक आज राज्य की प्रमुख समस्या है। राज्य के युवाओं को अपने लिये रोजगार के अवसर प्राप्त हो, गाॅवों से पलायन रूके यही मुख्य समस्या है।
2. आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को भी रोजगार परक शिक्षा और तकनीकी शिक्षा यह राज्य सरकार दे, जिससे सभी वर्गो को जीवन यापन एवं विकास के समान अवसर प्राप्त हो एवं प्रचलित शिक्षा का बाजारीकरण बंद हो, जिसके लिए बहुत कार्य किया जाना है।
3.बुनियादी जरूरतों में स्वच्छ पानी तक प्रदेश की जनता को प्राप्त नही पा रहा है। स्वच्छ पेय जल लोगों तक निःशुल्क पहुॅचे आज एक प्रमुख मुद्दा है।

(ख) क्षेत्रीय स्तरीयः-

विधान सभा क्षेत्र खटीमा एक सीमान्त पिछड़ा, तराई जनजातिय बहुल्य क्षेत्र है। स्वच्छ पानी से लेकर शिक्षा तक अनेकों क्षेत्र में अत्यधिक कार्य किया जाना है।
2. नेपाल से लगा हुआ सीमान्त क्षेत्र होने के कारण अनेकों समस्याएं जैसेः- माओवाद, तस्करी इत्यादी समस्याओं के सामाधान हेतु अनेंको कार्य जानेे हैं।
3. जनजाति एवं गैरजनजाति जमीनों के विवादों का समाधान।
4. कृषि आधारित क्षेत्रों में बाढ की समस्या एवं भूमि का कटानों का समाधान।
5. पाॅलिटेक्निक का निर्माण।
6. आई0टी0आई0 का निर्माण।
7. निर्माणधीन सरकारी अस्पताल का यथा शीध्र निर्माण कार्य पूर्ण करवाना।
8. रोडवेज बस स्टेशन का निर्माण कार्य।
9. खटीमा शहर में बाईपास का निर्माण।
10. खटीमा में 4-लेन सड़क का निर्माण कार्य।
11. सीमान्त बग्गा चैवन ग्राम सभा को राजस्व ग्राम धोषित करवान एवं सम्पर्क मार्ग से जोडना।
12. स्पोर्टस स्टेडियम का निर्माण।
13. डिग्री कालेज में अन्य पाठ्यक्रमों को शुरू करवाना।
14. लम्बे समय से जीर्ण क्षीर्ण सड़क बगिया धाट से चकरपुर तक निर्माण करवाना।
15. परवीन नदी पर यथा शीध्र पुल का निर्माण।
16. खटीमा क्षेत्र में आन्दोलकारीयों का चिन्ह्ीकरण एवं शहीद स्मारक का निर्माण।
17. उधोगों की स्थापना कर नौजवानों को रोजगार उपलब्ध कराना।
18. किसानों से जुड़ी समस्याओं का समाधान।
19. सभी ग्राम सभाओं में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाना है।

समाधान हेतु प्रयासः- राज्यों से शिक्षित बेरोजगारों का पलायन रूके इसके लिए आवश्यक है राज्य में अधिक से अधिक उद्योगों की स्थापना, पर्यटन के क्षेत्र का विकास, जल स्रोतों का वैज्ञानिक सोच के साथ उचित दोहन कर बिजली उत्पादन, हाॅटी कल्चर, फ्लोरी कल्चर, उद्यान, फल उत्पादन, जड़ी बूटी उत्पादन एवं फूल उत्पादन इत्यादी क्षेत्रों में बेरोजगारी युवकों को प्रशिक्षण देकर राज्य में ही पहाड़ों की जवानी का प्रयोग किया जाए जिससे पलायन रूके तथा युवा शक्ति का सदुपयोग प्रदेश के चहुॅमुखी विकास में हो सकें।

विजनः- चॅूकि समस्त युवा बेरोजगारों को सरकारी नौकरी उपलब्ध कराना वर्तमान में चुनौतीपूर्ण है इसलिए आवश्यकता है कि सरकार अपने प्रयासों से सभी वर्गो को सरकारी विद्यालय एवं महाविद्यालयों में से ऐसी तकनीकी, रोजगार परक शिक्षा एवं प्रशिक्षण प्रदान करे जिससे कि युवा वर्ग के लोगों को ड्रिगी प्राप्त करने के पश्चात तकनीकी रूप से स्वरोजगार के अवसरांे का लाभ उठाने हेतु कुशल बने एवं रोजगार प्राप्त हो सकंे। यह प्रशिक्षण राज्य सरकार अनेकों क्षेत्रों जैसेेंः- उद्योगों, पर्यटन के क्षेत्र में बिजली उत्पादन, हाॅटी कल्चर, फ्लोरी कल्चर, उद्यान, फल उत्पादन, जड़ी बूटी उत्पादन, एवं फूल उत्पादन इत्यादि क्षेत्रों में दे सकें। इन सभी के साथ-साथ एक महत्वपूर्ण विजन यह भी रहेगा कि जनसंख्या वृद्वि रोक जाने हेतु परिवार नियोजन, जन जागरण एवं जनता को सचेत किया जाना।

जनता के प्रति आपका सन्देशः- क्षेत्र एवं राज्य की जनता से मेरा यही विनम्र निवेदन है कि अपनी समस्याओं के समय-समय पर अवगत कराते रहें जिससे मैं उन्हे विधानसभा में सरकार के सम्मुख प्रमुखता से उठाते हुए उनका निराकरण आपके सहयोग से समय पर करा सकूॅ। मेरे द्वारा सदैव आपके स्वागत के लिए खुल हैं। सभी लोग, सभी वर्ग, सभी क्षेत्रों में जाति-धर्म के विचार से ऊपर उठकर सामाजिक उत्थान के लिए मिलजुलकर कार्य करें। अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति संजग रहते हुए सकारात्मक एवं प्रगतिशील सोच के साथ कार्य करें जिससे हमारा राज्य प्रगति एवं विकास के मार्ग पर अग्रसर हों।

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